कान्हा

This is my first poem, dedicated to my best friend.
I hope you may like it.:)

सूरज सा वो चमके , चंद्र सा वो शीतल है।
उसे बिंदी सा माथे पर सजना है, ऐसा सुंदर मेरा कान्हा है।

चंचल मन उसका नटखट है , भोलापन उसका सुहावना है।
नैनों में उसे बसाना हैं , ऐसा मनमोहना मेरा कान्हा है।

शहद सी मधुर वाणी  , हर लफ्ज़ जैसे एक तराना है।
किसी गीत सा उसे गुनगुनाना है, ऐसा सुरीला मेरा कान्हा है।

नेत्रों में मोती सी चमक , उसका पलके झपकाना तारों का टिमटिमाना है।
हर पल उसकी आँखों में खो जाना है, ऐसा लुभावना मेरा कान्हा है।

क्रोध है रुद्र सा , गुस्सा में भी उसके प्यार है।
प्रेम के रसपान से उसे मनाना है, ऐसा हटी मेरा कान्हा है।

मुस्कुराये तो मन झूम जाए, हर धड़कन उसके ही गीत गाये।
उसे सबसे छुपाकर दिल में बसाना है, ऐसा अनमोल मेरा कान्हा है।

शाम सा वो ढालता है, उसकी कमी में हर पल खलता है।
उसके मन को लुभाना है, ऐसा चित्तचोर मेरा कान्हा है।

हर धड़कन में मेरी वो बस्ता है, हर साँस पर उसका नाम है।
प्रेम है मेरा वो उसे ये बतलाना है, जैसा भी है वो मेरा कान्हा है।

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