एहसास

तुम साथ तो हो पर फिर भी एक अधूरा सा एहसास है।
चंचल मन खुशी के पंख लिए उड़ता तो है, पर अंदर से हताश है।
रंग भरें हैं जीवन में , पर एक बिनकही सी आस है।
तुम साथ तो हो पर फिर भी एक अधूरा सा एहसास है।
हौसलों की कश्ती पर सवार हैं , पर छिपी हुई एक डरी सी आवाज़ है।
धूप है आशाओं की, पर दिल कुछ उदास है।
तुम साथ तो हो पर फिर भी एक अधूरा सा एहसास है।
इसी सोच में हूँ आजकल कि क्या ये बंधन आज भी उतना खास है?
तुम साथ तो हो पर फिर भी एक अधूरा से एहसास है।

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